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Mohammed Merajuddin Arifi

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हर धर्म में किसी भूखे को खाना खिलाना सबसे बेहतरीन नेकियों में से एक है, जिसे रब अपनी रज़ा का ज़रिया बताता है। लंगर और खिलाने का अमल न केवल इंसान की भूख मिटाता है, बल्कि समाज में भाईचारा और मोहब्बत पैदा करता है ,और किसी बीमार की मदद करना और उसका इलाज कराना सुन्नत-ए-रसूल है; क्योंकि एक इंसान की जान बचाना पूरी इंसानियत को बचाने के बराबर है। अपनी पसंदीदा चीज़ों में से दूसरों को हिस्सा देना ही असल बलिदान है, जो रूह को पाकीज़ा बनाता है।

Mohammed Merajuddin Arifi

Mr. Irfan Khan

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बाबा हज़रत सैय्यद बंगलोरी मस्तान का कौल (वचन) है कि 'बेटा, कमाई के 12 पैसों कमाओ तो उसमें से 4 पैसे बांट दो ।' मैं अपनी जिंदगी उन्हीं की राह पर गुजार देना चाहता हूँ; मेरे लिए मस्तान की पैरवी ही बंदगी है और यही काफी है।"

"ज़माने की राहें मुझे अब कहाँ लुभाती हैं,
मस्तान! मेरी हर मंज़िल तेरे दर से होकर जाती है. या मस्तान सिखाया है आपने बांटने में ही असली सुकून है,
बस तेरे नक्श-ए-कदम पर चलना, अब मेरा जुनून है।"

Mr. Irfan Khan

Mr. & Mrs. Sujanti

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'अहार दान' को चार प्रमुख दानों में सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है, जहाँ भूखे जीव को भोजन कराना मोक्ष के मार्ग की ओर एक पुण्य कदम माना जाता है।लंगर की परंपरा यह सिखाती है कि ईश्वर की नज़र में कोई छोटा या बड़ा नहीं है; एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करना अहंकार को मिटाकर मानवता को जोड़ता है।चाहे वह कोई फकीर हो, गरीब हो या बेजुबान प्राणी, हर प्यासे को पानी और हर भूखे को निवाला देना ही सच्चा धर्म और असली 'सेवा' है।जैन धर्म के 'औषध दान' के अनुसार, बीमार और लाचार व्यक्ति को चिकित्सा और दवाइयाँ उपलब्ध कराना साक्षात जीव दया है, जो आत्मा को पवित्र बनाती है।

Mr. Jai sujanti & Mrs. Archana sujanti

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